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हर पीढ़ी उन्हीं मूलभूत प्रश्नों का सामना करती है। मैं यहाँ क्यों हूँ? जीवन को सार्थक क्या बनाता है? क्या इस शोर-भरी, अनिश्चित दुनिया में वास्तव में शांति संभव है?
पिछले 60 सालों में, जब दुनिया इतनी बदल गई है कि उसे पहचानना भी मुश्किल है, प्रेम रावत ने दुनिया भर के लाखों लोगों के साथ उन शाश्वत प्रश्नो को उजागर करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
इस दौरान, हम चाँद पर जा चुके हैं, इंटरनेट के माध्यम से अरबों लोगों को जोड़ चुके हैं, मानव जीनोम को समझ चुके हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निर्माण कर चुके हैं और आधुनिक जीवन के लगभग हर पहलू को बदल चुके हैं। दुनिया ने असाधारण गति से बदलाव देखा है। फिर भी, इन सभी बदलावों के बीच, एक प्रश्न उल्लेखनीय रूप से स्थिर बना रहा है:
वास्तविक शांति को अनुभव करने का क्या अर्थ है?
पिछले छह दशकों से, यह प्रश्न प्रेम रावत के कार्य के केंद्र में रहा है।
पूरी प्रतिबद्धता और सहजता के साथ, उन्होंने अपना जीवन हर जगह के लोगों को ऐसी आंतरिक संतुष्टि की अवस्था को खोजने के लिए प्रोत्साहित करने में समर्पित किया है, जो बदलती परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती—न किसी पर्वत की चोटी पर, न किसी गुफा में, और न ही किसी काल्पनिक भविष्य में, बल्कि यहाँ और अभी।
जिस शांति की आप तलाश कर रहे हैं, वह आपके अंदर है। जिस खुशी की आप तलाश कर रहे हैं, वह आपके अंदर है। जिस प्यार की आप तलाश कर रहे हैं, वह आपके अंदर है।
— प्रेम रावत

मैं कौन हूं? मैं यहां क्या कर रहा हूं? सचमुच में अपने आप को जानने का अर्थ क्या है?
शाश्वत आमंत्रण
1966 में प्रेम रावत ने जिस दुनिया को पहली बार संबोधित किया था, वह आज की दुनिया से बहुत अलग थी। उस समय न इंटरनेट था, न स्मार्टफोन और न ही सोशल मीडिया। इन दिनों लोग जिस तरह संवाद करते हैं, उसके लगभग हर पहलू में बदलाव आ चुका है। और फिर भी, आश्चर्यजनक रूप से, प्रेम रावत के कार्य का मुख्य केंद्र लगभग वैसा ही बना हुआ है।
हम खुद को उसके सबसे शुद्ध रूप में अनुभव करने की यात्रा पर हैं।
— प्रेम रावत
जीवन के आरंभिक वर्षों में शुरू हुई एक यात्रा
प्रेम रावत ने पहली बार चार वर्ष की आयु में सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू किया और अपनी असाधारण उपस्थिति से कई लोगों को आश्चर्यचकित किया। आठ वर्ष की आयु में, अपने पिता श्री हंस जी महाराज के निधन के बाद, उन्होंने अपने पिता के कार्य को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी स्वीकार की और लोगों को यह समझने में सहायता की कि सचेत, कृतज्ञ और संतुष्ट जीवन जीने का क्या अर्थ है।
बहुत कम लोग कल्पना कर सकते थे कि प्रेम रावत के शुरुआती वक्तव्य एक ऐसी आजीवन यात्रा की शुरुआत होंगे, जो 100 से अधिक देशों में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करेंगे।
तब से, उनका काम राजनीतिक व्यवस्थाओं, संस्कृतियों और पीढ़ियों से ऊपर उठकर, किसी भी विचारधारा या धर्म से बंधे बिना आगे बढ़ा है। लोगों से कोई नई मान्यता या विश्वास अपनाने के लिए कहने के बजाय, वे उन्हें जीवन के अपने असली अनुभव को खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
बिना अनुभव के, हम जो कुछ भी सोचते और मानते हैं, वह सिर्फ़ एक थ्योरी है।
— प्रेम रावत
जैसा कि प्रेम रावत अक्सर कहते हैं, वे खुद को ऐसे व्यक्ति के तौर पर नहीं देखते जिनके पास थोपने के लिए जवाब हों, बल्कि एक ऐसे आईने की तरह देखते हैं जो हर इंसान के भीतर पहले से मौजूद चीज़ों को दिखाता है। वे अनुयायी नहीं बनाना चाहते। वे बस लोगों को एक ऐसा आज़माया-परखा तरीका बताते हैं जिससे वे अपने भीतर की सही दिशा पहचानने की क्षमता को खोज सकें।
उनके कार्य का मूल
प्रेम रावत जो कुछ देते हैं, वह प्रेरणादायक सम्बोधनों या आम ‘सेल्फ़-हेल्प’ सलाह से बढ़कर है। लोगों से कोई नई मान्यता या विचारधारा अपनाने के बजाय, वह उन्हें शांति का ऐसा स्रोत खोजने के लिए प्रेरित करते हैं जो सफलता की सामाजिक परिभाषाओं से अलग और स्वतंत्र है। इसी उद्देश्य से, वे आत्म-ज्ञान की व्यावहारिक विधि सिखाते हैं, जो लोगों को बाहरी दुनिया से अपना ध्यान हटाकर उस शांति पर केंद्रित करने में मदद करती हैं जो पहले से ही उनके भीतर मौजूद है।
उनके कार्य को प्रेरित करने वाले सिद्धांत सरल और गहरे, दोनों हैं:
- शांति मनुष्य की एक मूलभूत आवश्यकता है।
- स्थायी शांति की शुरुआत व्यक्ति से होती है।
- प्रत्येक व्यक्ति में आंतरिक शांति का अनुभव करने की क्षमता होती है।
- अपने आप की समझ किसी भी विचारधारा से अधिक मूल्यवान है।
- जीवन वर्तमान क्षण में ही जिया और अनुभव किया जाता है।
नई पीढ़ियों तक पहुँचना
जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में बदलाव आया है, वैसे-वैसे प्रेम रावत के लोगों को उनके असली स्वरूप को जानने के लिए आमंत्रित करने का तरीका भी बदला है। उनकी व्यावहारिक बातें अब कई तरह के प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए लोगों तक पहुँच रही हैं। हर साल होने वाले 60 से ज़्यादा पब्लिक इवेंट्स के अलावा, उनका कार्य लाइवस्ट्रीम, पॉडकास्ट, ऑनलाइन कोर्स, वेबसाइट, टीवी और रेडियो इंटरव्यू, वीडियो और किताबों के ज़रिए भी उपलब्ध है।
उनकी सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक, “स्वंय की आवाज: शोर भरी इस दुनिया में शांति कैसे पाएं।” जिसे 2021 में हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित किया गया था, न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्टसेलर बनी और तब से इसका 16 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
उनकी अगली पुस्तक, “श्वास: जीवन के प्रति जागरूक हों”, एक ऐसे अनुभव के बारे में बताती है जो हर मनुष्य के लिए एक जैसा है — वह श्वास जो जीवन के हर पल में हमारे साथ रहती है।
उनकी आगामी पुस्तक, “हू आर यू?”, इस खोज को आगे बढ़ाती है कि पूरी तरह से जागरूक, जीवंत और असली मनुष्य होने का क्या मतलब है।
उनके मानवीय कार्य लगातार विस्तृत हो रहे हैं।
हालांकि प्रेम रावत का मुख्य संदेश व्यक्ति के भीतर से शुरुआत करने का है, लेकिन उनके काम का असर वहीं तक सीमित नहीं रहता। 2001 में स्थापित ‘द प्रेम रावत फ़ाउंडेशन‘ (टीपीआरएफ) लोगों को उनकी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने में सक्षम बनाते हुए और उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करके सम्मान, शांति और समृद्धि को बढ़ावा देता है। चाहे मानवीय सहायता हो, ‘फ़ूड फ़ॉर पीपल‘ कार्यक्रम हो या ‘पीस एजुकेशन प्रोग्राम‘—टीपीआरएफ का काम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रति उनकी व्यावहारिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निम्नलिखित आँकड़े टीपीआरएफ के साथ प्रेम रावत के लगातार प्रयासों के विस्तार और पहुँच को दर्शाते हैं।
- भारत, नेपाल, घाना और दक्षिण अफ्रीका में वंचित बच्चों और जरूरतमंद अन्य लोगों को लगभग 1 करोड़ पौष्टिक भोजन के साथ स्वच्छ पानी और शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
- 80 देशों में 7 लाख से अधिक लोगों ने 45 भाषाओं में आयोजित शांति शिक्षा कार्यक्रम के सत्रों में भाग लिया है।
- 67 लाख डॉलर से अधिक की राशि से 190 से अधिक मानवीय अनुदानों को सहायता प्रदान की गई है, जो आपदा राहत, जल बुनियादी ढाँचे, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं, नेत्र देखभाल क्लीनिकों और जीवन को बेहतर बनाने वाली अन्य पहलों में सहयोग करते हैं।
असीम को मापना
जीवन में कुछ चीज़ों को मापना आसान होता है। कुछ को नहीं। कई मायनों में, पिछले 60 वर्षों में प्रेम रावत का लोगों पर पड़ा प्रभाव मापना हमेशा आसान नहीं रहा है, क्योंकि वे लोगों को जिस चीज़ को खोजने में मदद कर रहे हैं, उसका सार हमेशा मात्रात्मक रूप से मापा नहीं जा सकता—यह मात्रा से अधिक गुणवत्ता के बारे में है।
और फिर भी, जो लोग इसके प्रभाव को आँकना चाहते हैं, उनके लिए उनके प्रभाव के कई मापने योग्य उदाहरण हैं, जिनकी शुरुआत 100 से अधिक देशों के लोगों द्वारा व्यक्त की गई हजारों हृदयस्पर्शी अभिव्यक्तियों से होती है।
दुनिया भर में, विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले लोग किसी अप्रत्याशित चीज़ की खोज का वर्णन करते हैं—किसी नई मान्यता की नहीं, बल्कि अपने आप के साथ एक नए संबंध की।
प्रेम रावत ने मुझे जो दिखाया है, उससे मुझे लगातार प्यार और प्रेरणा मिलती है; और इससे मुझमें व्यक्तिगत साहस, मुश्किलों से उबरने की क्षमता, जोश और करुणा का भाव मज़बूत होता है।” — रोज़मेरी हर्ड, ऑस्ट्रेलिया
आत्म-ज्ञान की विधि का अभ्यास करने से मुझे अपने भीतर तृप्ति और शांति का अनुभव करने का अवसर मिला है।” — सरोज शर्मा, नेपाल
प्रेम रावत ने मुझे यह समझने में मदद की है कि मेरा असली स्वभाव शांति है और अपनी गहरी मानवीयता के साथ सामंजस्य से जीने के लिए मुझे जिन चीज़ों की ज़रूरत है, वे सब मुझमें मौजूद हैं।” — अला रोजर्स, USA
अब मैं जानता हूँ कि मैं एक ऐसी अवस्था में रह सकता हूँ, जो भय, अनिश्चितता और समय से मुक्त है। मेरा पूरा जीवन बदल गया है।” — राउल आर्तुरो मोंटालवेत्ती, अर्जेंटीना
ज्ञान का उपहार मुझे सिखाता है कि हर दिन को ऐसे उपहार के रूप में स्वीकार करूँ, जो आश्चर्यों से भरा है और मुझे विस्मय से भर देता है।” — सिल्वी आर्मंड, फ्रांस
रिकॉर्ड-तोड़ वैश्विक पहुँच
हालाँकि प्रेम रावत के कार्य के सबसे गहरे प्रभाव को केवल संख्याओं के आधार पर कभी नहीं मापा जा सकता, फिर भी इसकी असाधारण पहुँच के कुछ पहलुओं को मापा जा सकता है। हाल के वर्षों में, इस वैश्विक पहुँच को तीन गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के माध्यम से मान्यता मिली है।
- किसी एक लेखक द्वारा पुस्तक वाचन में सबसे बड़ी दर्शक संख्या (1,14,704)
- किसी व्याख्यान में सबसे बड़ी उपस्थिति (3,75,000)
- अनेक लेखकों द्वारा पुस्तक वाचन में सबसे बड़ी दर्शक संख्या (1,33,234)
ये रिकॉर्ड केवल अपने आकार के कारण उल्लेखनीय नहीं हैं, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे इससे कहीं अधिक अर्थपूर्ण बात को दर्शाते हैं: दुनिया भर के लोगों में अधिक शांति, स्पष्टता और संतुष्टि के साथ जीवन जीने की संभावना को तलाशने की स्थायी इच्छा।
संगीत, उत्सव और जीवन का आनंद
अपने लंबे जीवन के दौरान, प्रेम रावत ने हृदय और मन को खोलने के एक माध्यम के रूप में संगीत को अपनाया है। पहले भी उनके कई कार्यक्रमों में गायक, संगीतकार और बैंड शामिल रहे हैं। पिछले एक साल में उन्होंने क्रिएटिव अभिव्यक्ति के इस तरीक़े को और बढ़ाया है; उन्होंने कई ओरिजिनल गाने लिखे और प्रोड्यूस किए हैं, जिनमें आभार, संभावनाओं और जीवित होने के सरल आनंद जैसे विषयों को दर्शाया गया है।

इनमें से कुछ गीत “अनकवर लाइफ” नामक अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की एक नई श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। ये ऐसे अनुभवात्मक आयोजन हैं, जो संगीत, कहानी-वाचन और आत्मचिंतन को एक साथ जोड़ते हैं और प्रतिभागियों को जीवन के प्रति गहरी सराहना खोजने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
हाल ही में “अनकवर लाइफ” के आयोजन ब्यूनस आयर्स, ब्राइटन, फोर्ट लॉडरडेल, बार्सिलोना, बैड विलबेल, बोस्टन और बोलोन्या में हुए हैं।
शाश्वत ज्ञान को जानने का एक नया तरीका
वर्षों से प्रेम रावत के कार्य का अनुसरण करने वाले लोगों ने, लोगों तक पहुँचने के नए और अभिनव तरीकों को अपनाने की उनकी उल्लेखनीय तत्परता देखी है। इस निरंतर विकास की नवीनतम अभिव्यक्तियों में से एक है इंटेलीजेंट एक्सिस्टेंस — 2024 में उनके द्वारा शुरू किया गया एक लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म, जो उसी भावना को दर्शाता है जिसने दशकों से उनके कार्य को विशेषता दी है: शाश्वत विचारों को आधुनिक दर्शकों के लिए सुलभ बनाने के नए तरीके खोजना।
इंटेलीजेंट एक्सिस्टेंस की नई एनिमेटेड फ़िल्मों की श्रृंखला की पहली फ़िल्म (5:19)
लोग आज भी क्यों सुन रहे हैं
60 वर्षों के बाद भी प्रेम रावत की शिक्षाएँ लोगों को
क्यों प्रभावित करती हैं? शायद इसलिए कि वे ऐसी किसी चीज़ की बात करती हैं जो समय से परे है। टेक्नोलॉजी बदलती है। राजनीति बदलती है। अर्थव्यवस्थाएँ बदलती हैं। संस्कृतियाँ भी बदलती हैं। और फिर भी हर पीढ़ी खुशी, समझ, अर्थ और शांति की तलाश करती रहती है।
चाहे किसी ने पहली बार 1966 में आठ वर्षीय प्रतिभाशाली बालक के रूप में प्रेम रावत को सुना हो या आज उनके काम के बारे में जाना हो, आमंत्रण वही रहता है: रुकना, अपने भीतर झाँकना, खुद को जानना और ज़िंदगी का भरपूर आनंद लेना।
एक विरासत जो अभी भी आकार ले रही है
अधिकांश लोग 60वीं वर्षगाँठ को पीछे मुड़कर देखते हुए मनाते हैं। प्रेम रावत आगे की ओर देखने में अधिक रुचि रखते हैं। इसी उद्देश्य से, वे लगातार यात्रा कर रहे हैं, लिख रहे हैं, सुना रहे हैं और लोगों के मन और हृदय को खोलने के नए और ताज़ा तरीके विकसित कर रहे हैं।
आगामी 60वीं वर्षगाँठ के समारोह (गुरु पूजा) भारत में (31 जुलाई–2 अगस्त) और ऑस्ट्रेलिया में (7–11 सितंबर) आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद एक और महत्वपूर्ण पड़ाव आएगा: प्रेम रावत की नई पुस्तक “हू आर यू ?,” का प्रकाशन। यह पुस्तक भारत में अक्टूबर 2026 में हिंदी में और मार्च 2027 में अंग्रेज़ी में प्रकाशित की जाएगी।
समय भले ही तेज़ी से बीत रहा हो, लेकिन ज़िंदगी का बेहतरीन अनुभव पाने की चाहत बनी रहती है। यह चाहत आज भी उतनी ही जीवंत है जितनी 60 साल पहले थी, जब प्रेम रावत ने दुनिया में अपना कार्य शुरू किया था।
साठ साल बाद भी उनका संदेश बहुत सरल है: यह जानना कि शांति, आनंद और तृप्ति कोई दूर की चीज़ें नहीं हैं, बल्कि वे हमारे भीतर ही मौजूद संभावनाएँ हैं। जिन लोगों ने प्रेम रावत के साथ यह सफ़र तय किया है — और जो अभी इसकी शुरुआत कर रहे हैं — उनके लिए यह स्पष्ट है कि यह वर्षगाँठ सिर्फ़ बीते हुए समय का उत्सव नहीं है। यह उन संभावनाओं का उत्सव है जो अभी भी मौजूद हैं।
भारत में 60वीं वर्षगाँठ समारोह के बारे में अधिक जानकारी
गुरु पूजा, जिसे गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, एक पारंपरिक भारतीय त्योहार है, जिसकी परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। यह शिष्य और गुरु के बीच के संबंध का उत्सव है।
इस वर्ष, प्रेम रावत के साथ गुरु पूजा का आयोजन 31 जुलाई से 2 अगस्त तक दिल्ली, भारत में होगा। तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में संगीत, आत्मचिंतन, जुड़ाव और प्रेरणा शामिल होंगे।
हालाँकि आयोजन स्थल पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की क्षमता पूरी हो चुकी है, फिर भी दुनिया भर के लोगों को ऑनलाइन इसमें भाग लेने के लिए सादर आमंत्रित किया जाता है। पूरे भारत में कई स्थानों पर कम्युनिटी स्क्रीनिंग
भी आयोजित की जाएंगी, जिससे लोग एक साथ एकत्र होकर इस आयोजन का अनुभव कर सकेंगे।
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