लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ, दसवां दिन - audio

“आप कितने भाग्यशाली हैं कि आप अब तक के सबसे शानदार उपहार की देखभाल कर रहे हैं — जिसे 'जीवन' कहा जाता है। ऐसा शानदार उपहार जिसे 'मनुष्य' कहा जाता है — जो स्वतंत्र होने की इच्छा रखता है, संतुष्टि की इच्छा रखता है, शांति की इच्छा रखता है। शांति में रहो। आनंद में रहो। हृदय के भावों को पूरा करो। तब तुम भी, जीवन के महत्व को समझ सकोगे।” —प्रेम रावत

प्रेम रावत:

हेलो, हेलो, हेलो, सभी को! उम्मीद है आप सब ठीक हैं, सुरक्षित भी और सेहतमंद हैं कोरोना वायरस के इस समय में। तो मैं कुछ बातें करना चाहता हूँ पता है वो बातें जो मैं पूरा दिन सुनता रहता हूं। काफी अनिश्चितता है। कई गलतफहमी फैली हुई हैं। एक हाथ पर, हाँ, जो भी होता है उसका प्रभाव हम पर पड़ रहा है। जी बिल्कुल होता है और उनमें से कुछ गलत फैसले, हाँ बिल्कुल प्रभाव डालते हैं। क्योंकि आप देखिए अमेरिका को, पहले स्थान पर पहुंच गया है गलत कारणों की वजह से, पहले नम्बर पर और जब आप चीन और अमेरिका की आबादियों की तुलना करते हैं तो यह चीन से काफी कम है पर चीन काफी बेहतर है अमेरिका से, (और फिर हाँ मैं संख्या को देख रहा था, मैं राजनीतिक स्थिति में नहीं जा रहा हूं।)

तो हमें खुद ही कुछ फैसले लेने होंगे और वो कौन से फैसले होंगे जो हमें लेने हैं ? अब इस परिस्थिति में मैं निर्धारित बातें नहीं कह सकता, लेकिन खुद से एक वादा जरूर कर सकता हूं कि खुद में अच्छा महसूस करूंगा यह सुनिश्चित कर सकता हूँ मैं। क्योंकि मैं इस बारे में कुछ कर सकता हूं। मैं शायद कोरोना वायरस के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं शायद परीक्षण के बारे में कुछ ना कर पाऊं। मैं लाखों और चीजों के बारे में शायद कुछ ना कर पाऊं, पर अर्थव्यवस्था भी है उसमें एक, पर जो भी हो मैं जहां भी जाऊं, जहां भी जिस भी परिस्थिति में मैं चला जाऊं, क्योंकि पता है यह आसान नहीं है और सब जानना चाहेंगे यह बात। सबको बहुत अच्छा लगेगा यह कहना कि “हां यही तो होगा यह।” पर बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें है एक गलती फिर एक गलती फिर एक गलती — और मुझे भरोसा है कि वो गलतियां करते ही जायेंगे।

पर काफी समय पहले से जब अरब क्रांति हुई और मैं कुछ राजनैतिक नेताओं से मिल रहा था वहां पर। मैं इटली में था, मुझे याद है एक महिला वह अरब क्रांति की घटनाओं से बहुत प्रभावित थीं और उन्होंने मुझसे कहा कि “लोग कैसे जीवित रहेंगे ? लोग कैसे ठीक रह पाएंगे ? यह कितना बुरा है।” और मैंने कहा, “यही तो एक बात है अंत में जो सही होती ही है, वह है जनता। हम संभल जाते ही हैं कई राज्य, कई राजा, कई शासक आए और चले गए, कई सभ्यताएं आईं और चली गईं, लेकिन अंत में जनता जीवित रही।” और यह बहुत बड़ी बात है।

जानते हैं आप, जब आप इन महान साम्राज्य को देखते हैं जो नष्ट हुए हैं, पर लोग आगे बढ़े और वो बदल गये। उन्होंने खुद को जीवित रहने दिया है। तो मैं क्या कर सकता हूं ? अब सबसे पहले मुझे हिम्मत से काम लेना होगा, कमजोर बनकर नहीं। क्योंकि कमजोरी की वजह से हो सकता है कि मैं उस वक्त में मौजूद संभावनाओं को देख ही ना पाऊं। और दूसरी बात यह है, सबसे जरूरी बात — परिवर्तनशील बनना होगा।

कल रात मैं इसी बारे में सोच रहा था जैसे कि आप इन पेड़ों को देखें कुछ पेड़ बहुत ही सख्त होते हैं। वह लचीले नहीं होते वो टूट जाते हैं, बस खत्म, कट जाते हैं। और वो पेड़ जो हवा में भी लचीले रहते हैं तूफान में भी बचते हैं। क्योंकि वो मुड़ सकते हैं। क्योंकि वो झुक सकते हैं, क्योंकि वो हिल सकते हैं। अब हां बिल्कुल, जानते हैं जिस तरह हम खुद को देखते हैं “अब मैं हिल नहीं सकता मैं तो बस मैं ऐसा ही हूं।” हम अपने आपको एक पत्थर की भांति देखते हैं, पर जब वह तूफान आता है पत्थर बने रहना अच्छा नहीं हैं। सबसे अच्छी बात होगी लचीला बनना।

मैं आपको उदाहरण देता हूं। जब मैं ब्राजील में था हां बिल्कुल, मैं स्पेन से निकला और ब्राजील तक गया और स्पेन छोड़ने की बजह थी अर्जेन्टीना में जाना और फिर अर्जेन्टीना के बाद मुझे युरग्वे जाना था। और सबकुछ तय था और हम कुछ इवेंट्स करने वाले थे। एक जेल में जाने वाले थे और सबकुछ बढ़िया होने वाला था। तो मैं इसके इंतजार में था और मैं बार्सिलोना से उड़कर ब्राजील तक गया और मैं ब्राजील में था और फिर अचानक से यह ऐसा था कि शायद दूसरे दिन मुझे अर्जेंटीना जाना था, अर्जेंटीना की फ्लाइट लेनी थी मैं शायद साढ़े 4 घंटे या 4 घंटे दूर था ब्यूनस आयर्स (Buenos Aires) से और फिर अचानक से यह हुआ कि “अर्जेंटीना कोई नहीं जा रहा लॉकडाउन हो गया है।” और अब मुझे युरग्वे नहीं जाना क्योंकि मैं वहां जाकर इवेंट्स करूं और सभी लोग मुझे देखें और फिर इस कोरोना वायरस के फैलने की और संभावना बढ़े मैं यह नहीं चाहता था। यह कोविड-19 मुझे नहीं चाहिए, तो मैंने ना जाने का फैसला लिया।

तो अब मैं क्या करूंगा शायद वह हमें ले जाएं, शायद कुछ होने वाला है और यह परेशान करने वाला था, क्योंकि यह ऐसा था कि “ओके तो चलिए अफ्रीका चलते हैं। हम दक्षिण अफ्रीका चलते हैं!”

“नहीं आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते।” क्योंकि जब तक उन्हें पता चला कि हम दक्षिण अफ्रीका जा रहे हैं अगले दिन खबर आ गयी कि “आप दक्षिण अफ्रीका नहीं जा सकते वहां पर लॉकडाउन है” और मैंने कहा कि “अब एक मिनट रुकिए। मैं क्या करूंगा ? अब मैं यहां पर क्या करूंगा ?” और फिर अचानक से ही मैंने देखा एक परिस्थिति बदल रही है। यह पानी की तरह है यह बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती है, बदलती रहती है और जैसा कि आप जानते हैं बदलाव ऐसी ही चीज है। ज्यादातर लोग बदलाव से डरते हैं वो नहीं समझते इस बदलाव में क्या है। वो बस कह देते हैं “मुझे नहीं बदलना। मैं नहीं बदलना चाहता।”

इस पल में मेरी मानिए मैं भी बदलाब नहीं चाहता था। मेरा एक प्लान था! मेरा प्लान था मैं कई चीजें करूं सिर्फ मैं ही नहीं था। उसमें वो सब लोग भी शामिल थे अर्जेंटीना में जो मुझे देखने आने वाले थे। प्लान में वो लोग भी थे। उसमें वो सभी लोग थे जो वहां पर मंच लगाने वाले थे, माइक लगाने वाले लोग, ऑडियो ठीक करने वाले, वीडियो वाले, वो सब लोग जो वहां काम करने वाले थे और फिर जेल में जाने की जितनी अनुमति ली थी हमने वहां, मेरी विजिट के लिए। इसमें बहुत सारी तैयारियां की गई थीं। और वो बहुत देर से इंतजार कर रहे थे, काफी वक्त से कि मैं वहां पर आऊं, राह देख रहे थे, लेकिन “देखिए स्थिति को देखें यह आपके हिसाब से नहीं चल रही है समझ सकते हैं प्लान।” तो क्या था प्लान ?

हमारे पास कैमरा है और कैमरा यहां है और यह कैमरा पिक्चर बनाता है मैं नहीं कहता “पिक्चर लेता है” ध्यान रहे मैंने कहा “पिक्चर बनाता है” तो यह कैमरा यहां पिक्चर बनाता है और यह पिक्चर बहुत-बहुत ताकतवर होती हैं इन्हें कम नहीं समझना चाहिए — और यही वह वजह है कि मेरी उम्मीदें हैं उन पिक्चर्स की वजह से जो यहां बनती हैं तो मेरी ये सभी उम्मीदें थीं तो सबसे पहले प्रतिक्रिया “इसे करने की कोशिश करो पर यह तो नहीं हो सकता। आप नियंत्रण से बाहर हैं स्थिति बदल रही है। आप को पानी की तरह बनना ही है।”

जब आप पैक करें और सफर पर जायें पैक करके आपको तरल चीजों का ध्यान रखना होता है क्योंकि अगर आप ढक्कन ढंग से बंद ना करें तो पानी बह जाएगा। सबकुछ बह जाएगा, क्योंकि यही तो पानी की विशेषता है। इसे बहुत कम जगह चाहिए होती है। यह ऐसा ही है। कोई भी मौका मिलते ही यह बह जाता है और जहां जाना है वहां चला जाएगा। तो अचानक से ही यह ऐसा था। “अब एक मिनट रूकिये मैं इससे लड़ क्यों रहा हूं क्योंकि असल में मुझे वैसा ही बन जाना है जैसे कि परिस्थिति की मांग हो फिर कोई समस्या नहीं होगी। फिर कोई समस्या नहीं होगी।”

अब एक पायलट की तरह हम ऐसा हमेशा करते हैं। मेरा मतलब, अगर आपके रास्ते में एक तूफान आने वाला है आप आगे नहीं जाते आप कहेंगे “मैं इसके आस-पास घूम के जाऊंगा।” आप अपने रेडार पर देखते हैं, अपनी सैटेलाइट पिक्चर को देखते हैं और आप जानते हैं एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि कौन-सा रास्ता सबसे अच्छा है। आप एक बार हवा को देखेंगे और अगर हवा एक तरफ बह रही है तो आप तूफान वाली दिशा में नहीं जाएंगे। अगर आप जा सकते हैं तो विपरीत दिशा में जायें और अगर उसी दिशा में गये तो आपको काफी आगे जाकर घूमने का मौका मिलेगा और आप एक अच्छा जानकारी पूर्ण फैसला लेते हैं कि पता करें कि पार होगा या नहीं होगा। “क्या आपको आस-पास से जाना है ?” और हां बिल्कुल इसमें से होकर गुजरना अच्छा फैसला नहीं होगा।

अगर यह छोटा है तो कोई बात नहीं, पर अगर बड़ा है तो आपके इंजन को नुकसान हो सकता है। फिर अगर जा सकते हैं तो इसके बीच से निकलकर जाएं। फिर आप क्या करेंगे इसमें नीचे तो आप जाना नहीं चाहते तो आप इसके आसपास से निकल कर जायें। इसके पास से निकलेंगे तो मैंने देखा “मुझे लचीला बनना होगा। मुझे जाना है, लेकिन इस स्थिति में एक ही काम करना है स्थिति मेरे अनुसार से काम नहीं करेगी मुझे इसके अनुसार चलना है।” और फिर मतलब साफ होने लग गया जैसे कि “हां मेरे जीवन में यही तो दिशा है, मुझे लचीला बनना है।”

अब इस परिस्थिति में कहना आसान है लेकिन जब ऐसी परिस्थिति नहीं होती क्या मैं तब भी समझूंगा कि मुझे लचीला होना है, सोचिए ? या मैं बस वहां पिक्चर बनाता रहूंगा यह जो ऊपर कैमरा है यह पिक्चर बनाता रहे यह पिक्चर लेता नहीं, यह पिक्चर बनाता है और पिक्चर काफी कमाल की होती हैं यह। मैं चाहता हूं कि चीजें एक निर्धारित ढंग से हों! बस इतना ही! “अगर उस तरह से काम नहीं हुआ तो मुझे बुरा लगता है।” और ऐसे लोग भी हैं जो कहेंगे कि “अमीर और ताकतवर लोग उनके पास एक पिक्चर है और वो इस पर काम करते हैं।” हां कुछ अमीर और ताकतवर लोगों ने अपनी सारी संपत्ति नष्ट कर दी। क्योंकि उनके दिमाग में एक पिक्चर थी और यह हर रोज चलती और बदलती रहती है। यह हर रोज चलती है, यह पिक्चर बनती है और फिर होता है कि “मैं उस तरह करने की कोशिश करूंगा जिस तरह यह पिक्चर बनी हुई है।”

पर यह इसके बारे में नहीं है। यह इस पिक्चर को दोबारा बनाने के बारे में नहीं कुछ और है जो बना के लिया जा चुका है। एक पिक्चर है जो पहले से ही ले ली गई है और वह पिक्चर है आपका अच्छा रहना। आपकी सुरक्षा, आपकी ताकत, आपकी हिम्मत, आप देखिए, यही-यही तो बात है इस दुनिया में हर कोई आपकी बुराईयों के बारे में जानता ही है। आपको भी इनके बारे में पता है, कोई सवाल ही नहीं। आपको गुस्से के बारे में पता है, आपको डर का पता है, आपको संदेह का पता है, अनिश्चितता के बारे में जानते हैं। दुनिया में किसी को भी यह समझाने की जरूरत नहीं है, लेकिन इन बाकी चीजों के बारे में नहीं जानते जो आप में ही हैं। और अफसोस की बात है ये बाकी बातें सच में ताकतवर होती हैं। करुणा — अपने आप में ही, अपने आप से, क्योंकि अगर यह करूणा आप में नहीं है, आप दूसरों के प्रति करुणा नहीं दिखा पायेंगे।

मैं जानता हूं कि आप सबसे अच्छा वर्ताव करना चाहते हैं क्योंकि यही आपको सिखाया गया है। पर इसकी शुरुआत कैसे होती है, करूणा आपके लिए भी होनी चाहिए। पहली बात वह स्पष्टता इससे पहले कि आप किसी और को स्पष्टता दिखाएं वह स्पष्टता आपके खुद के भीतर होनी चाहिए वरना अगर आप ही देख ना पाएं तो इसमें वाहन चालक के लिए कौन-सी अच्छी खबर है अगर बाकी सबकी नजर ठीक हो,पर उसी की ना हो ? इस तरह कब तक चलेगी वह गाड़ी; इस तरह कब तक चलेगी वह कार; इस तरह कब तक चलेगी वह फ्लाइट सुरक्षित ढंग से अगर पायलट को ही कुछ नहीं दिख रहा और बाकी सबको दिख रहा है ?

तो आप जानते हैं कि यह सावधानी उन्हें ऑक्सीजन मास्क के लिये बरतनी होती है। अगर आपके पास एक बच्चा है या बच्चे हैं तो आप पहले अपना मास्क पहनिये क्योंकि अगर ऑक्सीजन की कमी से आप बेहोश हो गए तो आप छोटे बच्चे की मदद कभी नहीं कर पाएंगे। तो सबसे पहले आप में स्पष्टता होनी चाहिए, सबसे पहले आप में करुणा होनी चाहिए, आप में वह समझ होनी चाहिए और फिर उसके बाद सिर्फ उसके बाद ही आप यह किसी और को दिखा पाएंगे। तो यह ऐसा बन जाता है; यह है उन बातों के बारे में आप एक इंसान होने के नाते आप में कुछ लक्षण हैं, लेकिन क्योंकि — जो भी आप जानते हैं शायद आपको किसी ने नहीं सिखाया कि आप में यह ताकत है लेकिन आपको पता है कि आप में है। अब समय है उन्हें इस्तेमाल करने का और अगर आप करेंगे अगर आप स्पष्टता रखें, अगर आप समझदारी दिखाएं, अगर आप सभी संदेह को निकाल दें और स्पष्टता हो फिर परेशानी नहीं हो सकती। समय बीतने पर परेशानी नहीं रहेगी आप कदम ले पाएंगे। कम से कम वो बातें जो आपके मन में बनती हैं अगर आप उन्हें ठीक तरफ से देख पायें। ऐसा होता है मैंने हर जगह देखा है, हर जगह मेरा मतलब और मैं यह उदाहरण की तरह बताता हूं।

एक बार मेरे पोते का जन्मदिन था और हम उसके लिए सोचकर कुछ तोहफे लेकर आए। हमने सोचा था कि हम उसे जन्मदिन की पार्टी के बाद देंगे और कुछ ऐसे तोहफे थे जो उसने पार्टी से पहले ही खोल लिए थे और वह मेरे पास आता है और वह कहता है “यह मेरा सबसे खराब जन्म दिवस था” और फिर मैंने कहा “क्या!” और फिर उसने अपना तोहफा खोलना शुरू किया और उसने कहा कि “अच्छा नहीं यह अच्छा जन्म दिवस था।” यह कहां से आया ? ये बात कहां से आयी ? क्योंकि उसके पास उसके दिमाग में कुछ था। उसके मन में था कि उसका जन्मदिन कैसा होना चाहिए! और वह उसके हिसाब से नहीं जा रहा था। वह कुछ बदल गया था।

आप उन लोगों को देखें जिनकी शादी होती है और एक नया शो हुआ करता था उसे कहते थे “ब्राइडजिल्लास” और दुल्हन पागल हो रही होती थी क्योंकि उनके मन में एक धारणा थी कि शादी ऐसे होती है और जब वह उसके हिसाब से नहीं जा रही होती थी तो यह कैमरा जो यहां ऊपर लगा हुआ है यह कुछ कमाल की पिक्चर लेता है और फिर आप सबकुछ इसके हिसाब से सोचने लगते हैं, “यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ; यह कैसे हुआ ?” और आपकी दुनिया इसके आसपास घूमने लगती है तो इन परिस्थितियों में भी यह शायद थोड़ा मज़ाकिया है क्योंकि इस समय आपको नहीं पता कि क्या उम्मीद रखनी है। इस स्थिति की कोई तस्वीर है ही नहीं लेकिन अब धीरे-धीरे जैसे समय बीत रहा है पिक्चर सामने आ रही हैं “यह ऐसा होना चाहिए; यह वैसा होना चाहिए; यह ऐसा होना चाहिए!”

क्यों परिवार एक साथ नहीं रह पाते और एक-दूसरे को नहीं झेल पाते इन्हीं तस्वीरों की वजह से “मेरी आपसे यह उम्मीद है, मेरी आपसे यह उम्मीद है” ऐसी उम्मीद थी, ये सब उम्मीदों के बारे में है।” और उन्हें हटा दें अगर तो अचानक से व्यक्ति सरल हो जाता है और स्थिति आसान हो जाती है, जो बदल सकती है, बदलती है जो साथ चल सकती है और यही तो हैं आप, यही तो है संभावनाएं आप ऐसे हो सकते हैं। आपको यह दूसरा व्यक्ति नहीं बनना है, जो हमेशा ही भ्रमित रहता है, जो सोचता है, परेशान है और अजीब-सा रहता है और खोजता रहता है कि “यह कहां है; वह कहां है; यह कैसे होता है; यह कैसे काम करता है और यह कैसे चलता है ?”

आपको ऐसा नहीं करना है। आपको हिम्मत रखनी है। आपको स्पष्टता रखनी है और जो भी परिस्थिति हो जो भी मुश्किलें आपकी ओर आयें, मैं यह आपको बताना चाहता हूं कि आप में इतनी हिम्मत और साहस है कि आप कोई भी परेशानी या कोरोना वायरस आपकी ओर अगर आए तो आप उसको झेल सकते हैं। आप सहन कर सकते हैं उसे; आप सामना कर सकते हैं; आप अपना ख्याल रख सकते हैं; आप सुरक्षित रह सकते हैं। हां बिल्कुल यह दो दीवारों के बीच में है, वो दीवारें जो आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आपके लिए सबकुछ होना चाहिए। क्योंकि यह है। यह उनके बीच में है। यह सबसे कीमती तोहफा है, सबसे सुंदर तोहफा जो आपको दिया गया है पहले से ही आपको दिया जा चुका है और आप कर्ताधर्ता हैं। कितने खुशकिस्मत हैं आप कि आप कर्ताधर्ता हैं उस तोहफे के जिससे अच्छा और कुछ हो नहीं सकता और यह है जीवन — इसे कहते हैं इंसान होना, जो चाहता है आजाद होना, जो चाहता है संतुष्ट होना, जो चाहता है शांति से जीना! शांति से रहें। खुश रहें। हृदय की आकांक्षा पूर्ण करें और आप जीवन का महत्व समझ जायेंगे।

तो एक बार फिर उम्मीद है कि आप ठीक रहें। सुरक्षित रहें। आप सब सेहतमंद रहें। खुश रहें।

धन्यवाद।