लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ #52 (16 मई,, 2020) - Hindi - audio

"क्या आप अपना जीवन उसके लिए जीते हैं जो आपके पास पहले से ही है, या उसके लिए जो आपके पास नहीं हैं?" —प्रेम रावत

What do you live for? Do you live for what you have or do you live for what you don’t have? Now, if I start to get into this a little bit more, it is very possible that lot of executives here may say that’s going to make people in our corporation loose ambition. On the contrary, on the contrary, it will be real ambition, not fake ambition, achievable ambition versus unachievable ambition, human ambition instead of some strange dream. So, what is the situation of the world?

क्या परिस्थिति है इस दुनिया की ? जो भी आप परिस्थिति देख रहे हैं इस दुनिया की —

Whatever you are looking at in this world, who made that? I am not talking religiously here.

मैं धर्म की बात नहीं कर रहा हूं। जो कुछ भी परिस्थिति है, जो कुछ भी परिस्थिति है इस दुनिया की, वो किसने बनाई ? अब यहां लोग बैठे हैं, जो कहेंगे, ‘‘भगवान ने!’’ पर भगवान को आप काहे के लिए दोष दे रहे हैं ? जब भगवान की बनाई हुई नहीं है! भगवान ने पृथ्वी बनाई, भगवान ने आकाश बनाया, भगवान ने मनुष्य को बनाया और मनुष्य ने जो आज की परिस्थिति है, वो उसने बनायी। क्या परिस्थिति है ?

जरा सुनिए! लोग गरीब हैं। ठीक है जी ? लोग गरीब हैं। अमीर भी हैं, गरीब भी हैं। चक्कर यह है कि इस सारी — 7.7 बिलियन पॉपुलेशन में एक परसेंट — एक परसेंट, पैसे को कंट्रोल करती है। ये भगवान की बनाई हुई नहीं है।

देखिए! जितना भी सोना इस पृथ्वी से निकाला गया, जितने भी हीरे इस पृथ्वी से निकाले गए, वो कहीं गए नहीं हैं। ये नहीं है कि किसी के पास दस हजार हीरे थे, वो मर गया तो वो उनको ले गया। ना! वो सब यहीं हैं। सब के सब यहीं हैं! परंतु आज हम शांति की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं और इसलिए नहीं दे रहे हैं और मैं फिर आता हूं अपने प्रश्न के ऊपर दोबारा। क्योंकि हम जी किस चीज के लिए रहे हैं ? उसके लिए, जो है या उसके लिए, जो नहीं है ?

कहानी का टाइम! कहानी तो आप लोगों को पसंद होगी ? You like stories? कहानी तो पसंद होगी आपको ? सुनिए, कहानी सुनाता हूं।

एक व्यक्ति था और वो राजा के यहां काम करता था और हमेशा बड़ा खुश रहता था। हमेशा! और राजा को ये बात पसंद नहीं आई। तो राजा ने कहा, ‘‘मैं राजा हूं। मैं इतना खुश नहीं हूं, जितना ये है। ये कैसे संभव है! ये मेरा नौकर है और ये मुझसे भी ज्यादा खुश है।”

How can this be? He is just my servant and he is happier than I am. I am the king, I have the money, I have power, I have everything, I am not happy, he is happy. How can this be?

तो एक दिन उसने अपने मिनिस्टर को बुलाया। उससे पूछा कि ‘‘ये आदमी इतना खुश क्यों रहता है ? ये तो राजा है नहीं! मैं राजा हूं, मैं इतना खुश नहीं हूं, ये इतना खुश क्यों है ?’’

मंत्री ने कहा, ‘‘महाराज! ये जीता है उसके लिए, जो इसके पास है। आप जीते हैं उसके लिए, जो आपके पास नहीं है।’’

When the King asked the minister, how can this be — this man is so happy?

The minister said, “My king, he lives for what he has, you live for what you don’t have.”

The king goes, I don’t believe you, prove it.

He said, “Certainly”.

तो राजा और मंत्री ने एक प्लान बनाया और 99 पैसे एक बैग में डाले — सिर्फ 99 पैसे। एक रुपया भी नहीं, 99 पैसे! और उसके घर जा के छोड़ दिये।

99 Paises, shy one paisa to be a rupee.

उसके घर छोड़ दिया। अब वो घर आया, when he came home, घर आता है तो देखता है कि एक बैग रखा हुआ है तो बैग को खोला उसने। तो उसने गिने तो बड़ा अचंभा हुआ। 99 पैसे किसके हैं ? देखा उसने, कोई नहीं। उसको ख्याल आया ये मेरे हैं। मैं किसी को नहीं बताऊंगा। ये मेरे हैं। फिर सोचता है वो। कहता है, ‘‘काश! काश! मेरे पास एक और पैसा होता। एक, सिर्फ एक और पैसा होता तो ये पूरा एक रुपया बन जाता।”

बस! उसको चिंता लग गई कि जितना मैं कमाता हूं, उससे खा सकता हूं। अपना घर का किराया दे सकता हूं। सिर्फ यही कर सकता हूं। अब एक पैसा और कहां से लाऊं ? चोरी मैं करना नहीं चाहता। कैसे होगा, कैसे होगा ? और मेहनत करनी पड़ेगी। क्या करना पड़ेगा ? क्या नहीं करना पड़ेगा ? कैसे लाऊं ? कैसे लाऊं दोबारा ? तो दूसरे दिन जब वो दरबार में आया, कोई खुशी नहीं। चिंता में वो डूबा हुआ है कि एक पैसा और कहां से आयेगा ? जब राजा ने देखा, when the king saw, he was no longer happy, जब राजा ने देखा कि वो खुश नहीं है। कई दिन बीत गए ऐसे ही तो राजा को बड़ा बुरा लगा। उसने कहा — एक पैसा लिया उसने और नौकर के पास गया, नौकर को दिया — ‘‘ये ले! अब तेरा एक रुपया पूरा हो गया है।’’

कहा, ‘‘महाराज! वो 99 पैसे से पहले मैं खुश था। मेरा एक छोटा-सा घर था। आपकी नौकरी थी! और जो मिलता था, उससे मेरा पेट संतुष्ट हो जाता था। मैं — I was happy. जब ये 99 मिले तो मैं उस एक पैसे के लिए जीने लगा।

I started to live for that one paisa, now you have given me one paisa, you think I will be happy? No, now I want one o’one and when I get one o’ one, I will want one o’two and when I have one o’ two, I have one o’three.

My King! ये कभी खतम नहीं होगा अब, जबतक मैं जिंदा हूं, Till, I am alive my King, I am going to keep wanting more and more and more and more and more and more and more …., because, क्योंकि अब मैं उसके लिए जीने लगा हूं, जो मेरे पास नहीं है।”

आप लोग यहां बैठे हैं, आपने हो सकता है, ये कहानी पहले सुनी हो या नहीं सुनी हो। ठीक, आपका विचार गया होगा कि ये लालच की बात कर रहे हैं। मैं लालच की बात नहीं कर रहा हूं। आपके घर में परिवार है। आपके घर में परिवार है। आप कितना टाइम अपने परिवार के साथ बिताते हैं ? उनकी बात सुनते हैं। उनकी बात सुनते हैं कानों से। उनकी बात सुनते हैं! आप वही हैं, जो बोर्ड रूम में जा करके घंटों बैठेंगे और, और लोग, जो आपके नहीं हैं, उनकी बात सुनेंगे। पर घर में जो आपका सेंट्रल बोर्ड है, वो भी आपसे बात करना चाहता है, उसके भी कुछ प्रस्ताव हैं।

They have something to say too. Do you listen? Do you have the time to listen? If not, if, if you do, great, wonderful. If you don’t, then you are living for not what you have but what you don’t have. That’s the subtle difference. It is not about just greed, I am not here to lecture you on greed, I am not here to lecture you on morality. I am here to talk about what is real.

मैं जाता हूं, मैं जेलों में जाता हूं, लोगों को संबोधित करता हूं। I go to jails and I have been to prisons and talk to inmates that are there for life. On one sense, what difference would it make, what I tell them, they are in for life and I cannot help them escape. But, when they understand, जब वो समझने लगते हैं कि इस जीवन का अस्तित्व क्या है — देखिए! जो व्यक्ति जेल में है और उसको उम्र-कैद हो रखी है, उसके सपने क्या हैं कि कुछ ऐसा हो जाए कि मैं यहां से निकल जाऊं! Job ? नौकरी ? बड़ा महल ? बढ़िया कार ? सबसे बढ़िया खाना ? ‘‘मैं यहां से निकल जाऊं!’’

आप तो सोच भी नहीं सकते हैं कि ये रट — जब आप अगर कभी जेल में जाएं तो आप देखेंगे कि ये feelings सब में है। सबमें है! सब में! ‘‘कब निकलूंगा, कब निकलूंगा, कब निकलूंगा! कब निकलूंगा, कब निकलूंगा, कब निकलूंगा!’’

और ऐसे व्यक्ति को, How do you tell a person like this — good news? What can be good news for this person except one — Oh! You are coming out.

ऐसे व्यक्ति को, जो उस जेल से निकलना चाहता है बाहर, उसके लिए तो एक ही खुशखबरी है! वो ये है कि ‘‘हां जी! आप छूट रहे हैं कल!’’ और क्या खुशखबरी देंगे उसको ? क्योंकि उसकी इच्छा ही ये है! परंतु सुनिए! उसको भी हमने एक खुशखबरी दी! वो क्या दी कि तुम जीवित हो! और अपने जीवन को इन परिस्थितियों से मत तौलो! ये परिस्थिति बदलती रहेंगी। देखो इनको! तुमको कैदी किस चीज ने बनाया है यहां!

समझने की बात है! दीवाल ? ईंटों ने ? ईंटों ने ? आपका घर काहे का बना है ? ईंटों का बना है! और हो सकता है कि आपकी खिड़की में वैसे ही सलाख भी लगे हों। पर आपका घर है। और मैं तो उनको कहता भी हूं कि — भाई! यहां तो सिक्योरिटी भी बहुत बढ़िया है। बाहर गॉर्ड खड़े हुए हैं, बंदूक है, मशीनगन है। किसी को आने नहीं देते, किसी को जाने नहीं देते। सबकी आई.डी. चेकिंग हो रही है। और तीन टाइम का खाना मिलता है और शौचालय है। अमेरिका में तो कमरे में ही है — en-suite!

तो भाई! तुमको चक्कर क्या है ? मैं कहता हूं, तुम्हारी असली जेल है, यहां! {दिमाग की तरफ इशारा करते हुए} ये वाली नहीं। और जिस दिन तुम इससे निकल जाओगे, उस दिन तुम सचमुच में परम स्वतंत्र हो जाओगे।

आपको क्यों सुना रहा हूं मैं ? आप तो जेल में हैं नहीं! Because you too are imprisoned by that, that you live for, that doesn’t exist. Look and understand what you have. This life, this opportunity that you are alive. I was doing an interview, day before yesterday, very interesting, question was asked, “Where should I look for peace?” Question था कि ‘‘मैं शांति को, कहां उसकी खोज करूं ?’’

मैंने कहा, उस चीज की कैसे खोज करेंगे आप, जो आपके पास पहले से ही है ? शांति तो आपके अंदर है!

है घट में पर दूर बतावें, दूर की बात निरासी।

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

वो तो अंदर है। पर आपके पास जो है, आप उसके लिए नहीं जी रहे हैं। जो आपके पास नहीं है, उसके लिए आप जी रहे हैं। Big problem, big problem.

उसके लिए जीना शुरू कीजिए, जो आपके पास है तो आपको कौन मिलेगा ?

अलख पुरुष अविनाशी।

उसके लिए जीना शुरू करिए, जो आपके पास है।

नर तन भव बारिधि कहुं बेरो।

सनमुख मरूत अनुग्रह मेरो।।

ये शरीर जो आपको मिला है, ये इस भवसागर से पार करने का साधन है। आपकी समस्याओं से पार होने का साधन है, तरीका है।

आपकी problems — भवसागर की definition बहुत बड़ी है साहब! भवसागर में इस दुनिया भर की जो समस्या हैं, वो भी आ गई हैं। और इस भवसागर को पार करने का ये साधन है और —

सनमुख मरूत अनुग्रह मेरो।।

इस स्वांस का आना-जाना ही मेरी कृपा है। ये मैंने नहीं बनाया है।

सनमुख मरूत अनुग्रह मेरो।।

इस स्वांस का आना-जाना ही मेरी कृपा है। तो अगर इस स्वांस का आना-जाना ही मेरी कृपा है — और उधर कहा हुआ है कि —

है घट में पर दूर बतावें, दूर की बात निरासी।

सोई हंस तेरे घट माहीं, अलख पुरुष अविनाशी।।

तुम्हारे अंदर है।

मृग नाभि कुण्डल बसे, मृग ढूंढ़े बन माहिं।

ऐसे घट घट ब्रह्म हैं, दुनिया जानत नाहिं।।

कहां है ? वो भी आपके अंदर है। तो वो भी आपके अंदर है, वो अलख पुरुष भी आपके अंदर है, स्वांस भी आपके अंदर है — मतलब, ये सारी चीजें आपके पास पहले से ही हैं! तो अगर ये सारी चीज आपके पास पहले से ही हैं तो जरा मेरे को आप ये बताइए कि आप क्यों नहीं जानते हैं इन चीजों के बारे में ? आपको तो मालूम होना चाहिए न ?

प्रत्येक में — कोई कहे कि ‘‘भगवान तुम्हारे अंदर है’’ और आपने कहा, ‘‘हां जी! हां जी! हां जी!’’ ना! इससे काम नहीं चलेगा। अगर कोई — आपको प्यास लगी है, आप रेगिस्तान में हैं और आप प्यास से मर रहे हैं — You are in the middle of the desert dying of thirst and somebody comes to you and says, “Do you have water?”

And you say, “Yes, yes, yes, I know, I know water, you need water, it’s okay, it’s okay.”

नहीं! नहीं, नहीं, नहीं! आप ये चाहते हैं कि जब आपने ये प्रश्न पूछा उससे कि ‘‘क्या आपके पास पानी है ?’’

देखिए! वो कोई भी जवाब दे, पर आप ये चाहते हैं कि जब आप उससे प्रश्न पूछें कि ‘‘क्या तुम्हारे पास पानी है ?’’

तो वो जवाब दे, ‘‘हां! और ये रहा!’’

नहीं ? नहीं ? यही तो चाहते हैं आप ? अगर आप प्यास से मर रहे हैं तो आप ये थोड़े ही जानना चाहते हैं कि ‘‘डॉलर का क्या भाव है ?’’ आप यह जानना चाहते हैं कि ‘‘फलां-फलां कार की वारंटी कितने साल की है!’’ नहीं। आप चाहते हैं, एक उत्तर चाहते हैं आप। और वह उत्तर है — ‘‘हां! यहां हमारे पास पानी है! लीजिए!’’

तो जब भगवान की बात आती है, उस पारब्रह्म की — और मैं भगवान की बात, रिलिजियस नहीं कह रहा हूं। मैं प्रत्यक्ष अनुभव की बात कर रहा हूं। बोलने वाला नहीं। बोलने वाला नहीं! मैं मैन्यू की रोटी की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उस रोटी की बात कर रहा हूं, जिसको आप खा सकते हैं। दोनों में बहुत अंतर है! मैन्यू — एक तो होती है मैन्यू की रोटी! जब आप रेस्टोरेंट में जाते हैं तो उसकी फोटो भी होती है, उसका वर्णन भी होता है और देखने में भी बड़ी अच्छी लगती है वो। और उसका वर्णन भी बहुत अच्छा होता है। ये शुद्ध घी की — इसमें शुद्ध घी है, इसमें बढ़िया आटा है, इसमें इतनी कैलरिज हैं, इसमें इतना ग्लूटन है, इसमें ये है, इसमें वो है। और वो सबकुछ बढ़िया लगता है। और एक होती है खाने वाली।

जापान में जाइए आप। आपको जगह-जगह प्लास्टिक का खाना देखने के लिए मिलेगा। प्लास्टिक! उसको आप खा नहीं सकते हैं, वो दिखता बड़ा बढ़िया-सा है। पर उसको आप खा नहीं सकते। तो एक होता है, एक रोटी होती है डिस्क्रिप्शन की, मेन्यू की और एक होती है खाने वाली। वो जो खाने वाली है न, वही आपकी भूख मिटा सकती है। मेन्यू वाली नहीं। मेन्यू का काम है कि आपको वो उस तरफ संबोधित करे, ताकि आप उसको ऑर्डर करें! ऑर्डर करके आएं और आप उसको खाएं और खाकर के अपनी भूख मिटाएं।

लोग रह जाते हैं, ‘‘हां! गए थे, देखो जी!’’

अब आजकल तो सब चीजों की फोटो खींची जाती है न! तो निकाला अपना फोन और मेन्यू की फोटो खींची और कोई कहे कि ‘‘कहां गए थे ?’’

‘‘भाई! रेस्टोरेंट गए थे। बहुत ही बढ़िया रोटी थी। देखो! ये इसकी फोटो है। रोटी की फोटो!’’

उससे किसी की भूख नहीं मिटेगी। तो मैं कहना चाहता हूं यही कि आप अपने जीवन में उस चीज का अनुभव करिए, जो आपके पास पहले ही है! What you already have, that’s what is important.

और मैंने आपसे एक बात और कही थी। मैंने कहा था — मैं बताऊंगा कि शांति कैसे मिलेगी ? कहा था न मैंने ? तो जब आप उन चीजों को खोजने लगेंगे, जो आपके पास पहले ही है तो surprise, surprise, surprise! एक चीज आपके पास पहले से ही है। उसका नाम है — शांति, जो आपके अंदर है। जब आप खोजना शुरू करेंगे बाहर नहीं, अंदर — उन चीजों को लेना शुरू करेंगे, जो आपके पास पहले से ही हैं तो आपको शांति भी उसमें जरूर मिलेगी। क्योंकि वो आपके अंदर पहले से ही है।