लॉकडाउन प्रेम रावत जी के साथ #35 (27 अप्रैल, 2020) - Hindi

"यह जीवन एक संयोग का समय है जहाँ वह अविनाशी, और नाशवान, दोनों मिल गए हैं। नाशवान अभी भी नाशवान है और अविनाशी अभी भी अविनाशी है। इसे कहते हैं - मनुष्य। यह हैं आप, यह हूँ मैं।" —प्रेम रावत (27 अप्रैल, 2020) 

प्रेम रावत जी:

सभी श्रोताओं को मेरा नमस्कार!

काफी सारी वीडियो बन चुकी हैं और धीरे-धीरे प्रश्न भी कम होते जा रहे हैं। लोग अपने भाव ज्यादा प्रकट कर रहे हैं, प्रश्न कम हो रहे हैं। जब चालू किया था तो पहले भाव लोग जो प्रकट कर रहे थे वह कम थे, प्रश्न ज्यादा थे। अब धीरे-धीरे प्रश्न कम हो रहे हैं और जो भाव हैं वह लोग और भी प्रकट कर रहे हैं। यह तो अच्छी बात है कि कोई चीज समझ में आ रही है कि जो भी दिक्कतें आती हैं, जो भी दिक्कतें होती हैं यह नहीं है कि उनको वहां बैठ करके और गुस्सा आए उन पर कि “यह कैसे होगा!” जैसे कहा है कि —

सो परत्र दुख पावहि सिर धुनि धुनि पछिताइ।

कालहि कर्महि ईस्वरहि मिथ्या दोष लगाइ।।

सभी को दोष लगाते हैं "इसने ऐसे नहीं किया, इसने ऐसे नहीं किया।" परन्तु यह सब करने की जरूरत नहीं है। यह सब चीजें जैसे बोझ की बात है, आपके गर्दन पर, आपके कंधों पर बोझ है इसको उठाकर अलग रखिये। इससे आपका कुछ लेना-देना नहीं है। यह जो समस्याएं हैं, यह जो परेशानियां हैं पहले किसी और को सताती थीं अब आपको सता रही हैं और आपके बाद किसी और को पकड़ेगीं। यह तो हमेशा होता रहता है।

तो चलिए एक अलग किस्म की बात करते हैं। तो क्या बात है — एक अविनाशी है जो आइंस्टाइन ने जिस चीज को समझाया है  E = mc2 — “जो था, जो है, जो हमेशा रहेगा; जो अनंत है, जो यहां भी है; वहां भी है; ऊपर भी है; नीचे भी है; कोई ऐसी जगह नहीं है जहां वह नहीं है और कोई ऐसी चीज नहीं है जिसके अंदर वह विराजमान नहीं है, हर एक चीज में है।"

एक तो हुआ वह अविनाशी, जिसको नापा नहीं जा सकता, जिसको तौला नहीं जा सकता, जिसकी फोटो नहीं खींची जा सकती, जिसका चित्र नहीं बनाया जा सकता और यहां तक उस चीज को आप अपने ख्यालों से, अपने विचारों से भी नहीं पकड़ सकते हैं। मतलब, कोई अगर आपसे कहे कि वह क्या चीज है तो आप बता नहीं सकते कि वह क्या चीज है। क्योंकि यह जो ख्याल हैं, यह जो हमारे विचार हैं इनकी भी एक सीमा है। उस सीमा के बाद यह नहीं जा सकते। छोटा-सा उदाहरण जो आपने पहले सुना हुआ है कि आम का क्या स्वाद होता है ? तो स्वाद जो है उसका अनुभव किया जा सकता है, उसका वर्णन नहीं। उसका वर्णन करना मुश्किल है। इलायची — आप सब लोगों ने खाई है इलायची ? इलायची की सुगंध कैसी होती है उसका वर्णन कैसे करेंगे ? आपको मालूम है जब मैंने कहा, “इलायची” तो हो सकता है कि आपको इलाइची का अनुभव भी हुआ हो। आपको अच्छी तरीके से मालूम है कि इलाइची का स्वाद क्या है! और अगर कम से कम स्वाद नहीं मालूम तो उसकी जो खुशबू है वह कैसी है आपको मालूम है अच्छी तरीके से, पर उसका वर्णन नहीं कर सकते हैं।

ठीक इसी प्रकार एक अनंत है, अविनाशी है — "था, है, रहेगा उसी से सबकुछ आया है, उसी में सब कुछ समाप्त होता है।" एक तो है “वह” जो सब जगह है, जो अनंत है। उसका उल्टा क्या है ? उसकी अगर परछाई को देखें तो वह क्या है ? वह है नाशवान — "जो नहीं था, अब है और आगे नहीं रहेगा।" एक चीज जो सब जगह है, एक चीज जो सब जगह नहीं है। एक चीज वह जिसका कभी अंत नहीं होगा, एक चीज वह जिसका अंत होगा। इन दोनों की मैं बात क्यों कर रहा हूँ ? वह इसलिए कर रहा हूं कि यह जो समय है, जिस समय में आप जीवित हैं यह एक ऐसा समय है जब आप सुनते हैं कि यह जीवन है, यह आपकी जो जिंदगी है, यह सबकुछ — जब यह चीजें सुनते हैं तो पता नहीं आपके मन में क्या-क्या बातें आती होंगी — "यह मेरा जीवन है! आप अपना चेहरा देखते होंगे, अपना नाम सुनते होंगे या कुछ ऐसे ही विचार करते होंगे। जो आपकी नौकरी है, जो आपको परिवार है, जो आपका मकान है, जो आपकी जिम्मेदारियां हैं, जो आपकी समस्याएं हैं, जो कुछ भी आपकी जिंदगी के अंदर होता है उसके बारे में हो सकता है आप सोचें।"

परन्तु यह जो संयोग है यह कुछ ऐसा है कि इस संयोग में वह जो अनंत है, वह जो अविनाशी है और यह जो नाशवान है यह दोनों मिल गए हैं। मिल तो जरूर गए हैं, परंतु नाशवान अभी भी नाशवान है और अविनाशी अभी भी अविनाशी है। क्या हुआ है — यह अपने में ही एक चमत्कार है कि अविनाशी जो नापा नहीं जा सकता, जो अनंत है वह एक ऐसी चीज के अंदर आकर बैठ गया है वह एक ऐसी चीज में समा गया है, जो बहुत छोटी है। अनंत नहीं है और जिसका नाश होगा इसे कहते हैं "मनुष्य" — यह हैं आप, यह हूँ मैं। यह जो आप बाहर देख रहे हैं इसका नाश होगा, यह नाशवान है। इसके अंदर क्या बैठा है, कौन बैठा है ? इसके अंदर बैठा है "अविनाशी" — जिसका कभी नाश नहीं होगा। जबतक यह है तब तक एक मौका है और मौका क्या है कि यह जो अविनाशी है इसको यह नाशवान, इसका अनुभव कर सकता है, इसको पकड़ नहीं सकता है, इसको खींच नहीं सकता है, इसको पकड़कर काबू में नहीं रख सकता है। क्योंकि इस शरीर का ही नाश होगा। जब नाश होगा तो फिर दोनों की दोनों चीजें अलग हो जाएंगी।

जो अविनाशी है, वह कहां जायेगा ? वह तो — वही है जो जा नहीं सकता कहीं। वह यहां भी है, वहां भी है। और यह जो नाशवान है, यह नाशवान शरीर और नाशवान चीजों में, जिनसे बनकर यह आया है उनमें जाकर समा जाएगा और उनसे एक हो जाएगा, फिर नहीं रहेगा यह। यह जोड़ जो बना है फिर वह जोड़ नहीं रहेगा, वह अलग हो जाएगा। इसकी जो यह संभावना है कि “यह नाशवान शरीर, इसमें रहते हुए आप उस अविनाशी का अनुभव कर सकते हैं।” यह बात है, यह है आपकी असली जिंदगी। यह है आपकी (existence) इग्ज़िस्टन्स। यह है आपकी लाइफ। यह है आपकी संभावना। यह है आपकी शक्ति और अगर यह आपने कर लिया तो आपका सक्सेस यही है, आपकी सफलता यही है और अगर यह नहीं किया और इस सारे संसार की बातों में ही लगे रहे तो वह जो जोड़ हुआ है, जो यह मिलन हुआ है यह अलग तो होगा एक दिन और उसके बाद क्या होगा किसी को नहीं मालूम, कोई गारंटी नहीं देता है। गारंटी कैसे देगा — कोई उसके साथ थोड़े ही आएगा, तुम्हारे साथ थोड़े ही जाएगा कोई, कौन जाएगा — धर्मपत्नी, पति, बेटे, रिश्तेदार, तुमको चाहने वाले! अगर वह चाहें भी तब भी तुम्हारे साथ नहीं जा सकते।

एक पंडित जी वह — अभी ऑस्ट्रेलिया में प्रोग्राम हुआ था (मेरे ख्याल से एक-दो साल पहले) तो वहां वह आए। तो उनको मैं जानता हूं अच्छी तरीके से तो मैंने उनसे कहा कि "देवी-देवता आपको दिखाई दिए आप तो बादलों के ऊपर से चलकर आए ?" क्योंकि यही लोगों को, जब लोग नहीं उड़ते थे तब लोगों को यही बताया जाता था कि "बादलों के ऊपर देवी-देवता रहते हैं।" अब कितने ही लाखों-लाखों लोग उड़ते हैं और देवी-देवता किसी को नहीं दिखाई देते। हम बादलों के ऊपर खूब उड़े हुए हैं हमने कभी देवी-देवता को वहां नहीं देखा। यह सारी बातें हैं इनमें हम विश्वास करते हैं। अब मैं नहीं कह रहा हूं कि विश्वास करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, यह तो आपके ऊपर निर्भर है। कोई कहता है "यह ऐसा होता है तो ऐसा होता है फिर ऐसा होता है तो फिर ऐसा होता है!" यह सारी बातें हैं लोग इन बातों पर विश्वास करते हैं कि "मैं जाऊंगा फिर ऊपर मेरी आत्मा जाएगी और फिर वहां रह करके या तो स्वर्ग जाएगी या नरक जाएगी फिर मेरे को यहां वापिस आना पड़ेगा, मैं फिर यहां वापिस आ जाऊंगा और सबकुछ ठीक हो जाएगा।"

परन्तु जब याद ही नहीं है कि कौन थे, क्या था — देखिए जब लोग मज़ाक करते हैं, कई बार मज़ाक करते हैं, तो क्या करते हैं, वह मास्क पहन लेते हैं, (नकाब एक तरह का) मास्क पहन लेते हैं तो मास्क में आदमी भयानक लग रहा है, जैसे भूत लग रहा है दांत हैं लंबे-लंबे, बड़ी-बड़ी आंखें हैं यह सबकुछ, दाढ़ी है। व्यक्ति तो वही है और हो सकता है कि वह आपका बेटा हो। यह मान लीजिये कि वह आपका बेटा है और बेटा आपको डराना चाहता है। तो वह छिप जाए आपके कमरे में। आप आएं कमरे में और जैसे ही आप अंदर आयें अपने कमरे में और वह वा.. वा.. वा..वा. करके आपको डराए। तो आप डर जाएंगे, क्यों डर गए आप ? बेटा तो आपका ही है। मास्क पहना हुआ था उसने, पर बेटा तो आप ही का था और बेटा वह अब भी आपका है। तो आप डरे क्यों अपने बेटे से ? क्योंकि एकमात्र मास्क देख लेने से, उसका चेहरा न देखने से आपको लगा कि "यह पता नहीं कौन है?" तो जब आपका चेहरा बदल जाएगा, जब आप किसी नए शरीर में आएंगे, आपका चेहरा बदल जाएगा, तो जो कुछ भी आपको आज याद है अपने बारे में, वह याद थोड़े ही रहेगा। फिर वही बात हो जाएगी "यह किसका चेहरा है, यह कौन है ?"

फिर अगर आपकी बीवी आपके पास आये और आप तो हैं जवान, इतने बड़े और बीवी आपकी सफेद बाल, कहे — "तू ही मेरा पति है।" तो फिर गड़बड़ नहीं होगी, बिलकुल गड़बड़ होगी। मतलब, यह सारी बातें जो लोग समझाते रहते हैं, लोगों को कहते हैं कि "इस पर विश्वास करो, इसमें विश्वास करो" — खुद ही तुक नहीं है उनके पास। पर बात सिर्फ यह है कि क्या आपको यह बात समझ में आई कि "जो यह आपको शरीर मिला है, जो यह समय है आपके पास इस नाशवान शरीर से आप उस अविनाशी का अनुभव कर सकते हैं।" यह संभावना है, यही संभावना, इसी संभावना को आप शांति कह सकते हैं। क्योंकि जब उसका अनुभव होगा, उस अविनाशी का अनुभव होगा तो अपने आप शांति आएगी। जो आपके हृदय के अंदर स्थित शांति है वह बाहर उभर कर आएगी। बात समझ में आएगी।

जो हम देखते हैं बाहर कि "यह ऐसा हो रहा है, यह गलत है या यह सही है, यह गलत है। जो चीजें हमें दुःख देती हैं अब जरूरी नहीं है कि वह दुःख हमें दे। दुःख है — यह तो वही वाली बात है कि बारिश तो होगी पर अगर छाता है तो तुमको भीगने की जरूरत नहीं है। बात तो समझने की है। अगर यहां समझ में आ गई कि “यह संभावना है यह भी पूरी करनी है।” क्योंकि लगे रहते हैं लोग क्योंकि आपको पट्टी तो पहले से ही चढ़ाई हुई है — "यह करो, यह करो, यह करो तो यह होगा, यह होगा, यह होगा, यह होगा, यह होगा, यह होगा!"

किसी को कहा हुआ है अब — अभी एक प्रश्न में किसी ने कहा कि "हमको कहा है कि हम बहुत ही खराब हैं, हम यह हैं, हम वह हैं और हमारा कुछ नहीं होगा, हम देखने में भी भद्दे हैं और कुछ नहीं होगा!"

भगवान ने आपको दो कान दिए हैं एक कान से सुनिए, एक कान से बाहर निकाल दीजिए। देखिए जब बंदर आपकी तरफ देखता है तो क्या सचमुच में वह सोचता होगा कि आप बहुत खूबसूरत हैं ? नहीं, वह तो यह सोचता होगा कि "यह ऐसा बंदर, भद्दा देखने में कौन है!" जब कौआ आपकी तरफ देखता है तो यह थोड़े ही सोचता है कि "आप कितने खूबसूरत हो" उसको तो कौआ ही खूबसूरत लगता है। कौए को कौआ और बंदर को बंदर, बिल्ली को बिल्ली, कुत्ते को कुत्ता। और अगर जो आपसे यह कह रहा है कि आप देखने में भद्दे हो तो वह मनुष्य नहीं होगा, क्योंकि कुछ भी हो आप बनाया तो उसी ने है। बनाया तो उसी प्रकृति ने है जिस प्रकृति ने किसी और को बनाया है। सुंदरता चेहरे पर नहीं, सुंदरता हृदय में होती है, सुंदरता आंखों में होती है, सुंदरता इस मुस्कान में होती है। तो अगर यह बात नहीं समझा कोई तो यही चक्करों में पड़ा रहेगा। इसके लिए कहा है कि —

चलती चक्की देख कर, दिया कबीरा रोए।

दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए।।

कोई नहीं बचा। सभी इसके अंदर पीसते रहते हैं, पीसते रहते हैं, पीसते रहते हैं, पीसते रहते हैं। और अगर पीसने से बचना है तो —

चक्की चक्की सब कहे किल्ली कहे न कोय।

जो किल्ली के पास में बाल न बाँका होय।।

वह किल्ली क्या है! सारी चीजें जिसके आस-पास चल रही हैं। वही अविनाशी जो आपके अंदर विराजमान है, उससे नाता जोड़िये। उससे नाता जुड़ गया तो फिर इन चीजों में आपको जो दुःख मिलता है, उस दुःख की कोई जरूरत नहीं रहेगी। इसका मतलब यह नहीं कि बारिश नहीं होगी पर जब भी बारिश होगी तो अपना छाता खोलिये, ज्ञान रुपी छाता खोलिये और भीगने से बच जाइये।

सभी श्रोताओं को मेरा बहुत-बहुत नमस्कार!