साथ साथ, न० : 7 - श्रृंखला, श्री प्रेम रावत द्वारा - सूक्ष्म दृष्टिकोण

"जबतक तुम हो तुम्हारा असली में है क्या ? ये माया या वो जो था, है और रहेगा। और उसको जान लो, उसको समझ लो, तो तुम्हारे जीवन में आनंद ही आनंद है। और उसको नहीं समझ पाए, तो भटकते रहोगे।" —प्रेम रावत