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लॉकडाउन नौवां दिन, प्रेम रावत जी द्वारा हिंदी में सम्बोधित ( 29 March, 2020)
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990
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“आपके पास क्या है? मूल चीज पर एक नज़र डालें: आपके पास जीवन है, यह अद्भुत चीज जिसे 'अस्तित्व' कहा जाता है। वह आप हैं! आप महसूस कर सकते हैं। आप समझ सकते हैं। आपके पास हृदय है। आप अभी भी नफरत की बजाय दया पसंद करते हैं, कष्ट की बजाय आनंद पसंद करते हैं, दुविधा की बजाय स्पष्टता पसंद करते हैं — क्योंकि आप कौन हैं ... आप एक मनुष्य हैं।" —प्रेम रावत


प्रेम रावत जी "पीस एजुकेशन प्रोग्राम" कार्यशालाओं की वीडियो श्रृंखला को आप तक प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान हम उनके कुछ बेहतरीन कार्यक्रमों से निर्मित लॉकडाउन वीडियो आप के लिए प्रसारित करेंगे। 

प्रेम रावत:

सबको नमस्कार! मुझे उम्मीद है आप सब ठीक हैं। मुझे पता है कि कुछ लोग यह वीडियो देख रहे हैं, ऐसे भी कई लोग हैं जो यह वीडियो देख रहे हैं जिन्हें बीमारी लग चुकी है। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द ठीक हो जाएंगे। गंभीर समय, गंभीर मुद्दे, लेकिन अच्छा महसूस करना अब भी महत्वपूर्ण है। अच्छा सोचना अब भी जरूरी है। सुरक्षित होना अब भी जरूरी है और अच्छा होना अब भी जरूरी है।

"यह तो बस केवल इस समस्या के बारे में नहीं होना चाहिए?" नहीं, क्योंकि यह वह समस्या है जो हमारे लिए हद से ज्यादा बढ़ सकती है। जी हां! बिल्कुल हाथों से बाहर निकल सकती है, अगर हम इसे सही ढंग से नहीं देखते और इसके अनुपात हैं "हां यह गंभीर हैं लेकिन इसी समय में कुछ और भी चल रहा है। इस महामारी के अलावा भी एक आपातकालीन स्थिति है यह कोरोना वायरस महामारी और वह है आपका जीवन, आपका अस्तित्व, आप।" यह आपके जीवन के सफर में एक हिचकी है। आपकी समझ, आपका अपना रास्ता और वह मंजिल जो आपने अपने लिए चुनी है। तो सवाल यह उठता है, हां बिल्कुल है कि "वह क्या है जो आपने अपने लिए चुना है ?

बहुत सारे विचार हैं, बहुत सारे मुद्दे हैं, लेकिन इस समय वो बातें जो सच में जरूरी हैं उनके बारे में कुछ भी हो सकता है। क्योंकि यह नहीं है..... एक तरह से आप बीमारी के बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं और कैसे यह फैलती है और बाकी चीजें भी, लेकिन फिर भी बिल्कुल सावधानियां लेते रहिए। जी हाँ! और यह बहुत सशक्त कर सकता है आपको — आपके लिए ही अपने हाथ धोएं, दूरी बनाए रखें, बीमारी ना लें और ना ही बाकी लोगों को बीमारी दें। बिल्कुल पहले बीमार ना हो जायें, लेकिन अगर बीमारी हो जाए फिर भी हिम्मत रखें और स्पष्टता और समझ भी। इनकी जरूरत पड़ेगी आपको। और मैं इन्हीं बातों पर चर्चा करना चाहता हूं।

तो मेरे लिए यह वो मुद्दा नहीं है जिसमें "क्या मैं भूकंप को रोक सकता हूँ ?" नहीं, लेकिन घर मजबूत करने में मदद जरूर कर सकता हूं और यही जरूरी है। तो अगर भूकंप आया या भूकंप नहीं भी आया कम से कम घर तो मजबूत है ना, लचीला है इतना कि जो भी हो वह ठीक रहेगा और हमें इसी बारे में बात करनी है। यही हमें समझना है। क्योंकि आपके पास क्या है ? आधार पर नजर डालिये — मूलभूत आधार पर। आपके पास जीवन है और आप इन परिस्थितियों में आपके पास अब भी आपका कमाल का अस्तित्व है। आप जीवित हैं! जी हाँ! आप महसूस कर सकते हैं, आप समझ सकते हैं, आपका एक हृदय है। आप नफरत से अधिक करुणा को मानते हैं। आप दर्द से ज्यादा खुशी को चाहते हैं। दुख से ज्यादा, आप संदेह से ज्यादा, स्पष्टता चाहते हैं — आप ऐसा ही करते हैं और आप यह इसलिए करते हैं, क्योंकि जो आप हैं, आप एक इंसान हैं। शायद आपका कोई निर्देश-पत्र नहीं है, लेकिन आपकी बहुत सारी पसंद जरूर हैं और इस दुनिया में आपको उथल-पुथल से ज्यादा शांति पसंद है।

यह बात है कि "अंत में हमें खुद पर नियंत्रण रखना ही है!" और इससे मेरा क्या मतलब है ? क्योंकि पूरा दिन हम अपने अच्छे होने की जिम्मेदारी को किसी और की वजह से दरकिनार करते हैं — "ओह! डॉक्टर मेरा ख्याल रखेगा, ओह! यह नहीं तो वह मेरा ख्याल रखेगा, सरकार मेरा ख्याल रखेगी।" इस वक्त कुछ जो नेता हैं (अब वह सभी नहीं बिल्कुल) पर कुछ नेता वह इतने बुरे हैं मेरा मतलब वह तो बस सोच ही नहीं रहे। अकल्पनीय है यह! ऐसे लोग भी हैं जो ज्यादा काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभागों में वो लोग जो काम कर रहे हैं और उनकी तारीफ हो रही है और मैं भी उनकी तारीफ करता हूं और उन्हें कुछ नेताओं के फैसलों के परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं जिन्हें कुछ नहीं पता कि वह क्या कहते हैं, उन नेताओं को कुछ नहीं पता कि वह क्या कर रहे हैं और अंत में यह एक मौका नहीं है आरोप लगाने का। यह मौका है अपने अस्तित्व को संभालने का।

मैं यह कहता आया हूँ आज नहीं — हमेशा से ही कि आपको अपना जीवन संभालना है। जी हां! आपको ही, आप ही वह देवदूत हैं जो खुद को बचाने आए हैं और मैं यह कितने समय से कहता आया हूं, कितनी बार कहा मैंने। पर अब इस पर कोई सवाल नहीं रहा और कोई भी संदेह नहीं रहा है। क्या आप की तकनीकी आपको बचाएगी ? जी नहीं! नया फोन खरीदने से कुछ नहीं मिलेगा। कोई व्यक्ति कुछ नया लाता है उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता और अब आप आधार पर लौट आइए। क्यों ? जी हां! 6 फुट की दूरी रखें, अपने हाथ अच्छे से धोएं, दूरी, दूरी, दूरी! वाह! आपका मतलब, "और अब कोई सरकार मेरी मदद नहीं कर सकती अगर मैं दूर नहीं रहा ?" जी नहीं! "मुझे अपने खुद के साथ उठना होगा!" जी हां!, "क्या मुझे अपनी बातों को सुधारना पड़ेगा ?" जी हां! "और मैं इन सबको कैसे झेलूँगा, यह अलग रहने का समय और बाकी सब कुछ।" अब देखिए, यही तो आपको करना है।

अब सवाल आता है कि “अच्छा, लेकिन "अब क्या आपको पता है आप कौन हैं ?" और इसलिए मैं कहता हूं, पता है, तीन बातें कर सकते हैं "आप खुद को जानिये; अपने जीवन को सचेतना से जीयें......" और यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है "जीवन सचेतना से जीयें।" आपको सिर्फ अपना जीवन जीने को नहीं मिलता पर आपको इसे सचेतना से जीना है, आपको जागरूक रहना है "मैं क्या चाहता हूं, मैं क्या कर रहा हूं और वह कौन है, क्या चल रहा है ?"

"अपने जीवन को अच्छे से जीयें" और तीसरी बात "जीवन में कृतज्ञता लाएं।" क्योंकि इससे सब झेलना मुमकिन हो जाता है — कृतज्ञता से! हृदय से धन्यवाद देना — इस सबके बीच में भी महसूस करना कि "वाह! मैं जीवित हूं" और हर रोज जब मैं जीवित हूं धन्यवाद दीजिये, सराहना कीजिये।

तो इस बात का यह रहा सार — आप! और आपको आना है और फिर आपको वयस्क बन जाना है। शायद ऐसी ही चीज के लिए — हम सब बिल्कुल किसी और को जिम्मेदारी सौंप देते हैं जैसे कि "कोई और मेरा ख्याल रखेगा।" बहुत सारे लोग हैं वह तो बस — "ओह हां! मेरी सारी समस्या हल हो जाएंगी, अगर मैं चर्च के भीतर चला जाऊं। मेरी सभी समस्याएं सुलझ जाएंगी, अगर मैं मंदिर चला जाता हूँ। मेरी सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी अगर मैं मूर्ति के समक्ष झुक जाता हूं।" लेकिन अब आप नहीं जा सकते। तो अब आप क्या करने वाले हैं ? यह कितना सरल है कि जिसकी आपको आराधना करनी है वह आपके भीतर ही है। वाह, मेरा मतलब, शानदार! ऐसी समस्या आ भी गई तो कोई बात नहीं। वह शांति का समुद्र आपके भीतर है — वाह बढ़िया! वह स्पष्टता का समुद्र आपके भीतर ही है, जबरदस्त! और यही समय है जानने का, समझने का और महसूस करने का।

वह एक बात कि समुद्र में एक बूंद है यह सभी जानते हैं, लेकिन एक बूंद में समुद्र है यह बहुत कम लोग जानते हैं। यह समय है बूँद में समुद्र ढूंढने का। क्योंकि वह बूंद कबीर के अनुसार आप स्वयं ही हैं! वह आप हैं। इस बूँद में समुद्र खोजिए। और इस समय जो कुछ भी चल रहा है यह रुक जाएगा। आपको तथ्य जानने होंगे, झूठ नहीं। हर कदम जो आप लेंगे वह तथ्य के साथ होना चाहिए, झूठ के साथ नहीं। आपको स्पष्ट होना है; आपको होना ही है — सच में यह समय है स्पष्टता की अहमियत समझने का। यह समय है सचेतना की अहमियत समझने का। यह समय है पूर्ण होने की अहमियत समझने का। और यही समय है अस्तित्व की अहमियत को समझने का और हिम्मत रखने का, कमजोरी नहीं। क्योंकि आप ये गलतियां करते हैं और ऐसे तो कोरोना वायरस का ही फायदा होने वाला है।

आदर्श स्थिति! हां! यही होगी एक आदर्श स्थिति कि आप महामारी से बच सकें और फिर अपनी सेहत का ध्यान रखें जबतक कि कोई समाधान या फिर कोई दवाई नहीं बन जाती और खत्म हो जाए यह बीमारी। वह होगी एक आदर्श स्थिति, पर कुछ लोग इतना इंतजार नहीं कर सकते; उनके पास तो है ही नहीं। लेकिन दोबारा, आपके पास — आप देखिए आपको समझना होगा आपके भीतर एक डॉक्टर है, सच में। वह सभी बातें जो आप में है आपके भीतर एक डॉक्टर भी है — और एक लैबोरेट्री है जिसमें लगातार परीक्षण होते रहते हैं। "अच्छा! मुझे ये नहीं पता! अच्छा! मुझे वो भी नहीं पता! मुझे कोरोना वायरस नहीं पता।" मुझे इसके लिए ऐन्टीबाडीज नहीं निकालनी होंगी और यही वह पहला डॉक्टर है जो कुछ भी करता है। और यह क्या करता है ? कई जगहों पर जहां यह देखते हैं, इसे पता है आपको यह लक्षण है तो यह भेजते हैं कि "घर जाइये, जी हां दूर रहिए!" ताकि आपका यह डॉक्टर आपका इलाज कर पाए।

पर वह डॉक्टर कब काम करेगा जब आप हिम्मत रखेंगे, जब आप भीतर से खुशी रखेंगे, जब आप में होगा आनंद, जब आप में होगी स्पष्टता। इन बुरी परिस्थितियों में भी और यह बहुत ताकतवर है; यह शक्तिशाली समय है। क्योंकि मैंने जो भी अब तक कहा वह सच हो रहा है और मैं नहीं कहता कि "मैं सही था और आप गलत" — यह मेरी बात नहीं है, पर मेरा कहना है कि "सुनिए जो मैंने कहा है, सुनिए जो मैं कह रहा हूं, क्योंकि जो मैं कह रहा था उससे आपको मदद मिलेगी।" और वो लोग जो बातें सुन रहे थे उनको पता है कि मैं क्या कह रहा था।

तो आपके भीतर की अच्छाई को उजागर कीजिए। उस अच्छाई को बाहर आना ही होगा इस वक्त। वह दो भेड़िए जो आप में लड़ते हैं — उसमें से अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दीजिए। यह वह समय नहीं है कि आप प्रयोग कर रहे हैं कि "क्या होगा अगर मैंने बुरे भेड़िए को बढ़ावा दिया। ?" जी नहीं, यह समय है जब आप अच्छे भेड़िए को बढ़ावा दें। बस! यह समय सवालों का नहीं है; यह समय नहीं है उन लाखों मुद्दों को उठाने का; यह समय है जानने का, यह मानने का समय नहीं है; यह समय है कि आप जानिए, जानिए कि अहमियत क्या है जानने की। यह समय है कि आप उभरकर आएं, खुद में वयस्क बनें। अपनी समझ में आप विकास करें। अपनी समझ में — और खुद को तलाशें, खुद को आप जानें। सचेत जीवन जीयें और हृदय को कृतज्ञता से पूर्ण करें। मेरे लिए यह एक जीत का मंत्र है, एक कमाल का जीतने का मंत्र।

तो सुरक्षित रहिए; अच्छे रहिए आप! और मैं आपसे फिर से मिलूंगा! धन्यवाद!